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जल संकट या संकट में जीवन – Divya Himachal: No. 1 in Himachal news – News – Hindi news – Himachal news…

– अविनाश कुमार, सोलन
इक्कीसवीं सदी का विश्व जल संकट दिन-प्रतिदिन विकराल रूप धारण करते जा रहा है और भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। जल संकट के कारण सूखा झेल रहे खेतों में किसान खेती नहीं कर सकता तथा भू-जल स्तर नीचे जाने के कारण पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई है। भारत में जल के मुख्यतः दो स्रोत हैं – नदियां और मानसून। वर्तमान समस्या यह भी है कि लगभग प्रत्येक नदी प्रदूषित हो चुकी है, जिनके जल के सेवन से अनेक बीमारियां लग सकती हैं। मानसून भी हर वर्ष रंग बदलता है। किसी वर्ष प्यास बुझा जाता है, तो किसी वर्ष जीव-जंतुओं से लेकर मनुष्य तक को पानी के लिए तरसा जाता है। हमें इस जल संकट से उबरने के लिए देश की नदियों को प्रदूषण के चंगुल से आजाद करवाना होगा और वर्षा जल संग्रहण पर अधिक बल देना होगा। यह तभी मुमकिन होगा, जब हम सरकार के भरोसे न रहकर, जनभागीदारी को अपनाएंगे।

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(साभार :  एजेन्सी / संवाददाता  / अन्य न्यूज़ पोर्टल )

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